शादी के जश्न में ‘सफेद जहर’ का तड़का: लोटन में पकड़ा गया पाउडर वाला पनीर, दुकानदार फरार!
सावधान! आपकी थाली में पनीर नहीं, 'कैमिकल' परोसा जा रहा है: बस्ती मंडल में मिलावटखोरों का तांडव। दूध गायब, फिर भी बह रही पनीर की नदियां: सिद्धार्थनगर में मौत का सामान बेच रहे 'सफेदपोश' अपराधी।
अजीत मिश्रा (खोजी)
मौत का सफेद कारोबार! बस्ती मंडल में ‘पाउडर’ वाला पनीर परोस रहे मिलावटखोर
रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- खाद्य विभाग की नाक के नीचे ‘मौत की मंडी’: 100 क्विंटल की मांग, उत्पादन शून्य, आखिर कहाँ सो रहा प्रशासन?
- नोटिस-नोटिस का खेल बंद करो साहब! जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले गुनहगार को सलाखों के पीछे भेजो।
- सहालग शुरू होते ही सक्रिय हुए ‘जहर के सौदागर’, लोटन की घटना ने खोली सुरक्षा दावों की पोल।
- पनीर खरीदने से पहले पढ़ लें यह खबर: कहीं आप भी तो नहीं खा रहे डिटर्जेंट और पाम ऑयल का मिश्रण?
- स्लो पॉइजन है यह पनीर! लिवर-किडनी डैमेज होने का खतरा, मिलावटखोरों से रहें सतर्क।
- सस्ते के चक्कर में जान न गंवाएं: मिलावटी पनीर की पहचान करें, लोटन जैसा धोखा किसी के साथ भी हो सकता है।
सिद्धार्थनगर/बस्ती: सावधान! अगर आप शादी-ब्याह के दावतों में बड़े चाव से पनीर की सब्जी खा रहे हैं, तो रुक जाइए। आपकी थाली में परोसा गया वह लजीज पनीर दूध से नहीं, बल्कि जानलेवा केमिकल और सफेद पाउडर से बना ‘सफेद जहर’ हो सकता है।
सिद्धार्थनगर के लोटन क्षेत्र में सामने आए ताजा मामले ने पूरे बस्ती मंडल के खाद्य सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। यहाँ एक शादी समारोह के लिए मंगवाया गया 10 किलो पनीर जब काटा गया, तो वह दूध की महक के बजाय पाउडर की दुर्गंध दे रहा था। जब तक खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुँचती, आरोपी दुकानदार दुकान बंद कर फरार हो गया।
मांग 100 क्विंटल, उत्पादन शून्य: आखिर कहाँ से आ रहा है पनीर?
हैरानी की बात यह है कि जिले में पनीर का वास्तविक उत्पादन न के बराबर है, लेकिन सहालग (शादियों के सीजन) में खपत 100 क्विंटल से ऊपर पहुँच जाती है। सवाल यह है कि जब दूध है ही नहीं, तो यह पनीर की नदियाँ कहाँ से बह रही हैं?
- सफेद जहर का नेटवर्क: दिल्ली, मुंबई और बंगाल से लौटे कारीगर अब गाँवों में मिनी फैक्ट्रियां खोलकर डिटर्जेंट, पाम ऑयल और सिंथेटिक पाउडर से पनीर बना रहे हैं।
- बस्ती-गोरखपुर रूट: सूत्रों की मानें तो बलरामपुर, फैजाबाद और गोरखपुर के रास्ते रातों-रात मिलावटी पनीर की खेप खपाई जा रही है।
सिस्टम की सुस्ती या मिलीभगत?
खाद्य सुरक्षा विभाग नोटिस जारी करने और कार्रवाई की बात तो करता है, लेकिन मिलावटखोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। लोटन की घटना ने साबित कर दिया है कि प्रशासन की नाक के नीचे ‘मौत की मंडी’ सजी हुई है। आरोपी दुकानदार का भाग जाना विभाग की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगाता है।
डॉक्टरों की चेतावनी: पनीर नहीं, ‘स्लो पॉइजन’ है यह!
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एस.के. राव के मुताबिक, यह सिंथेटिक पनीर केवल पेट खराब नहीं करता, बल्कि:
- लिवर और किडनी को पूरी तरह डैमेज कर सकता है।
- इसमें मौजूद डिटर्जेंट और केमिकल्स कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
- बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।
कैसे पहचानें असली और नकली पनीर?
- उबालकर देखें: पनीर को पानी में उबालें, अगर पानी झागदार हो जाए तो समझ लें इसमें डिटर्जेंट है।
- गंध और चमक: अत्यधिक चमक और कृत्रिम गंध मिलावट का संकेत है।
- आयोडीन टेस्ट: पनीर पर आयोडीन की कुछ बूंदें डालें, अगर यह नीला पड़ जाए तो समझ लीजिए इसमें स्टार्च/पाउडर मिला है।
ब्यूरो टिप्पणी: > जनता को चाहिए कि केवल भरोसेमंद और लाइसेंसधारी दुकानों से ही खरीदारी करें। प्रशासन को केवल कागजी नोटिस के बजाय इन ‘नरभक्षी’ व्यापारियों पर रासुका (NSA) जैसी कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसी की शादी की खुशी मातम में न बदले।










